भारत की आत्मा उसकी युवा शक्ति में बसती है। स्वामी विवेकानन्द ने डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जिस युवा भारत की कल्पना की थी, आज वही भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा राष्ट्र बन चुका है। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानन्द ने अल्पायु में ही भारत की सांस्कृतिक चेतना को विश्व मंच पर न केवल प्रतिष्ठित किया बल्कि भारत को लेकर बनाई गई भ्रांतियों को दूर कर पुनर्परिभाषित भी किया।11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण आज भी भारतीय आत्मगौरव का उद्घोष माना जाता है। “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का मंत्र है। राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं को आत्ममंथन और संकल्प का अवसर देता है। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानन्द की जयंती यानी राष्ट्रीय युवा दिवस केवल उनके व्यक्तित्व को स्मरण करना नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना को जाग्रत करना है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने स्वामी विवेकानन्द को अपना आदर्श मानते हुए इस दिवस को राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से जोड़ा है।
आज भारत की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा युवाओं का है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2025 में देश की जनसंख्या लगभग 146 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जिसमें 65 प्रतिशत से अधिक लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। यह जनसांख्यिकीय स्थिति भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने की क्षमता रखती है। स्वामी विवेकानन्द ने युवाओं से कहा था कि राष्ट्र का उत्थान उनके चरित्र, साहस और सेवा भावना पर निर्भर करता है। अभाविप के नेतृत्व में युवावर्ग स्वामी जी के उन्हीं विचारों के साथ आगे बढ़ रही है। भारतीय युवाओं ने न केवल अपनी पारंपरिक ज्ञान के साथ आगे बढ़ रही है बल्कि डिजिटलीकरण के दौर में तकनीक को भी तेजी से अपनाया है। इंटरनेट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल शिक्षण साधनों का बढ़ता उपयोग यह संकेत देता है कि युवा नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं। रोजगार के क्षेत्र में भी स्थिति में तेजी सुधार देखने को मिला है। युवाओं की बेरोजगारी दर में गिरावट आई है और रोजगार दर में निरंतर वृद्धि हो रही है। यह संकेत है कि यदि शिक्षा और कौशल विकास पर निरंतर ध्यान दिया जाए तो भारत जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा लाभ उठा सकता है।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर अभाविप द्वारा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्वामी विवेकानन्द जयंती पर संगोष्ठी, व्याख्यान, वाद-विवाद प्रतियोगिता, मैराथन इत्यादि का आयोजन किया जाता है। अभाविप द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से संदेश दिया जाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनना है। राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित प्रतियोगिताएं, निबंध लेखन, वाद-विवाद, पोस्टर निर्माण और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करती हैं। साथ ही रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे सेवा कार्यक्रम युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करते हैं। यही वह मार्ग है, जिस पर चलकर युवा केवल अधिकारों की नहीं, कर्तव्यों की भी बात करना सीखते हैं। साथ ही छात्रों में नेतृत्व, संगठन कौशल, निर्णय क्षमता और स्व-अनुशासन का भाव भी जागृत होता है। इन आयोजनों का उद्देश्य युवाओं को संगठित कर राष्ट्रहित के कार्यों के लिए प्रेरित करना है। स्वामी विवेकानन्द का स्पष्ट मत था कि संगठित और चरित्रवान युवा ही किसी राष्ट्र को महान बना सकते हैं।
(लेखक संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी हैं।)
