दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के हिंदी विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने कथित भेदभाव और मनमानी के खिलाफ सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। पूरा विवाद विभाग द्वारा जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें पीएचडी प्रवेश केवल जेआरएफ (JRF) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों तक सीमित रखने की बात कही गई है। इस निर्णय से नेट (NET) तथा ‘ओनली फॉर पीएचडी’ (Only for PhD) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, हिंदी विभाग में पीएचडी की 125 सीटें रिक्त हैं, जबकि 150 जेआरएफ योग्य अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है। वहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के नियमों के मुताबिक नेट और ‘ओनली फॉर पीएचडी’ योग्य अभ्यर्थी भी प्रवेश के पात्र होते हैं, जिनकी संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है। अभाविप ने मांग की है कि पूर्व वर्षों की तरह सभी पात्र अभ्यर्थियों-जेआरएफ, नेट और ‘ओनली फॉर पीएचडी’ को साक्षात्कार प्रक्रिया में न्यायसंगत और अनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि सभी को समान अवसर मिल सके।
अभाविप दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के मंत्री अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार तत्काल बंद किया जाना चाहिए और सभी योग्य अभ्यर्थियों को बराबरी का अवसर मिलना चाहिए। प्रदर्शन के बाद अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने विभागाध्यक्ष सुधा सिंह को ज्ञापन सौंपा। विभागाध्यक्ष ने अभाविप की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए पूर्व नियमों के अनुरूप प्रवेश प्रक्रिया लागू करने का आश्वासन दिया है। अभाविप दिल्ली विवि अध्यक्ष अभिनव चौधरी ने कहा कि वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया यूजीसी के मानकों के विपरीत है और इससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित नहीं किए गए, तो छात्रहित में आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
