नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर विवादों के कारण सुर्खियों में है। सोमवार की रात जेएनयू परिसर में विवादित नारेबाजी की गई। मंगलवार को ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ जैसे नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद जेएनयू एक बार फिर चर्चाओं में है।
अभाविप ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कल जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर वही पुरानी देशविरोधी मानसिकता सामने आई, जो समय-समय पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को ठेस पहुंचाती रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रविरोधी तथा हिंसात्मक गतिविधियों में संलिप्त उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज किए जाने के बाद, कुछ वामपंथी और तथाकथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम उग्र नारेबाज़ी की। इस दौरान न केवल संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने वाले नारे लगाए गए,अपितु भारत के माननीय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आरएसएस और अभाविप के विरुद्ध “कब्र खोदने” जैसे हिंसा को उकसाने वाले अमर्यादित नारे भी सुनने को मिले। यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं है, बल्कि 2016 से लेकर 2020 और उसके बाद तक जेएनयू में बार-बार सामने आती रही उसी विचारधारा की निरंतरता है, जिसने पहले भी आतंकवादियों के समर्थन, भारत की एकता-अखंडता पर हमले और संवैधानिक व्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास किया है।
अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा की गई नारेबाज़ी पूर्णत: देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भी जिस प्रकार संवैधानिक पदों और राष्ट्रविरोधी भाषा का प्रयोग किया गया, वह अस्वीकार्य है। अभाविप जेएनयू इकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित अराजकता मानती है।
अभाविप जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2016 की तरह इस बार भी जेएनयू प्रशासन की निष्क्रियता सामने आ रही है। हम विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में शामिल दोषी तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि परिसर को देशविरोधी गतिविधियों से मुक्त रखा जा सके।
अभाविप जेएनयू इकाई मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा की गई नारेबाज़ी पूरी तरह देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भी जिस प्रकार संवैधानिक पदों और राष्ट्रविरोधी भाषा का प्रयोग किया गया, वह अस्वीकार्य है। अभाविप जेएनयू इकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सोची समझी अराजकता मानती है।
बताया जाता है कि वीडियो वायरल होने के बाद जेएनयू प्रशासन ने इस मामले में वंसतकुंज (उत्तर) थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट चुकी है। वहीं दूसरी ओर जेएनयू प्रशासन भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।
