हैदराबाद : राष्ट्रीय युवा दिवस पर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) द्वारा “स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम” अभियान का शुभारंभ किया गया। अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने सभी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं को डिजिटल लत से बाहर निकालकर उन्हें प्रकृति, खेल एवं संस्कृति से जोड़ने की एक सार्थक पहल है, जिसे आगामी दिनों में अभाविप देशभर में एक परिवर्तनकारी अभियान के रूप में चलाएगी। युवाओं के शाश्वत प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती, जिसे ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाई जाती है, के अवसर पर देशभर के प्रमुख शैक्षणिक परिसरों एवं नगर इकाइयों में अभाविप द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का भव्य आयोजन किया गया।
अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि जब युवा अपने स्क्रीन टाइम को एक्टिविटी टाइम में परिवर्तित करेंगे, तभी एक स्वस्थ, सजग एवं समर्थ राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। आज का युवा तकनीकी युग का प्रतिनिधि है, किंतु मोबाइल एवं डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से उसके स्वास्थ्य, समय प्रबंधन एवं सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। देशभर के विद्यार्थियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अभाविप ने इस विषय को देवभूमि उत्तराखण्ड में आयोजित 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए प्रतिनिधि विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसी क्रम में आज राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य पर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री द्वारा पोस्टर विमोचन कर इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ के निर्वाचित अध्यक्ष शिवा पालेपू सहित समस्त छात्रसंघ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस अभियान के माध्यम से अभाविप युवाओं को यह संदेश देना चाहती है कि प्रगति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय एवं रचनात्मक भी होनी चाहिए। इसके अंतर्गत ‘स्क्रीन टाइम टू ग्रीन टाइम’, ‘स्क्रीन टाइम टू फन टाइम’, ‘स्क्रीन टाइम टू प्ले टाइम’ तथा ‘मील विदाउट रील’ जैसे आव्हानों के माध्यम से युवाओं को जोड़ते हुए उन्हें स्वस्थ एवं सामाजिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वर्तमान में एक विद्यार्थी औसतन 8-9 घंटे से अधिक समय तकनीकी उपकरणों पर व्यतीत कर रहा है, जिससे उसके सामाजिक एवं बौद्धिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कई विद्यार्थी कम उम्र में ही अवसादग्रस्त हो रहे हैं। अभाविप अपनी सभी इकाइयों के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा विद्यार्थियों से स्क्रीन टाइम घटाने एवं एक्टिविटी टाइम बढ़ाने का आग्रह करेगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी के माध्यम से सभी देशवासियों को राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की तथा ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज का युवा सूचना क्रांति के दौर में तकनीक का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वर्तमान में युवाओं का औसत स्क्रीन टाइम 8 से 9 घंटे तक पहुंचना एक गंभीर चिंता का विषय है। यह न केवल उनकी शारीरिक ऊर्जा का संकुचन कर रहा है, बल्कि उन्हें समाज एवं प्रकृति से भी दूर कर रहा है। इसका दुष्परिणाम यह है कि आज कम उम्र के युवा भी अनेक शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। अभाविप के ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान को केवल एक कार्यक्रम न मानकर एक सांस्कृतिक एवं स्वास्थ्य चेतना के जनआंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए। जब विद्यार्थी आभासी दुनिया से बाहर निकलकर मैदानों की हरियाली, खेलों की प्रतिस्पर्धा तथा समाज सेवा की संतुष्टि का अनुभव करेगा, तभी उसका वास्तविक बौद्धिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास संभव होगा। अभाविप देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सभी विद्यार्थियों से आग्रह करेगी कि वे अपने दैनिक स्क्रीन टाइम में से कम से कम 30 मिनट घटाकर उसे प्रकृति एवं रचनात्मक कार्यों में लगाएं, जिससे उनके समग्र विकास में तकनीक बाधा न बन सके। स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती पर इस अभियान की देशव्यापी शुरुआत की जा रही है और हमें पूर्ण विश्वास है कि यह अभियान भारत के युवाओं को पुनः अपनी जड़ों, प्रकृति एवं समाज से जोड़ने का कार्य करेगा।
