रांची में जेपीएससी एवं जेएसएससी से जुड़े विषयों को लेकर आयोजित प्रदर्शन के संदर्भ में आईसा द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार, भ्रामक एवं सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास हैं। विद्यार्थी हितों के वास्तविक प्रश्नों पर गंभीर चिंतन करने की जगह प्रायोजित घटनाओं तथा राजनीतिक प्रचार के माध्यम से मीडिया की सुर्खियां बटोरना आईसा की पुरानी कार्यशैली रही है। रांची की घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होती है, जहाँ स्याही प्रकरण को आधार बनाकर विद्यार्थी मुद्दों से ध्यान भटकाने और राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन स्पष्ट रूप से मानता है कि इस प्रकार की घटनाओं के आधार पर निराधार आरोप लगाकर भ्रम फैलाना विद्यार्थी राजनीति की स्वस्थ परंपरा के अनुकूल नहीं है।
विद्यार्थी आंदोलनों का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं राष्ट्रीय हितों की रक्षा होना चाहिए न कि झूठे नैरेटिव गढ़कर परिसरों को वैचारिक टकराव का अखाड़ा बनाना। आईसा लंबे समय से विद्यार्थी हितों के प्रश्नों को राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप मोड़ने तथा भारत को खंडित करने वाली विचारधारा को छात्र आंदोलनों के माध्यम से स्थापित करने का प्रयास करता रहा है। भारतीय विद्यार्थी समाज ऐसे प्रयासों को कभी सफल नहीं होने देगा और राष्ट्रहित एवं विद्यार्थी हित के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा रहेगा।
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि विद्यार्थी हितों के प्रश्नों के स्थान पर स्याही प्रकरण को राजनीतिक हथियार बनाकर मीडिया की सुर्खियां बटोरना आईसा की कार्यशैली को उजागर करता है। यदि किसी घटना की जांच अपेक्षित है तो वह निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए किंतु बिना किसी तथ्य के संगठन पर आरोप लगाना केवल सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक हताशा का परिचायक है। संगठन स्पष्ट रूप से मानता है कि विद्यार्थी आंदोलन राष्ट्र निर्माण की शक्ति हैं न कि राजनीतिक नौटंकी का मंच। भारत को खंडित करने वाली विचारधारा को शैक्षणिक परिसरों में स्थापित करने का प्रत्येक प्रयास विद्यार्थी समाज पहले भी अस्वीकार करता आया है और आगे भी कभी सफल नहीं होने देगा।
