नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(अभाविप) ने देश के लिए गौरव का विषय बताया एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवाओं के लिए की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं का स्वागत किया है। अभाविप ने कहा कि युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल प्रतिभा पहचान तथा आधुनिक सुरक्षा प्रशिक्षण से जोड़ने वाली पहलें भारत की युवा शक्ति को नए अवसर प्रदान करने के साथ ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करेंगी।
प्रधानमंत्री ने मिशन मोड के तहत अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षित करने की घोषणा की। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था तथा इसके लिए आवश्यक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की बात कही। गांवों और शहरों में 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए देशव्यापी खेल प्रतिभा खोज अभियान चलाने तथा उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा के ढांचे के आधुनिकीकरण और आधुनिक प्रशिक्षण की घोषणा भी की गई। अभाविप ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा, तकनीक, खेल और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में युवाओं को अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। एआई कौशल प्रशिक्षण और निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग जैसी पहलें विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होंगी, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और संसाधनों तक पहुंच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अभाविप कार्यकर्ताओं ने देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए और देशवासियों एवं युवाओं को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। अभाविप ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से इसके पूर्ण गायन का ऐतिहासिक अवसर प्राप्त होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है। संसद द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान एवं गायन को वैधानिक संरक्षण दिए जाने के निर्णय का भी अभाविप ने अभिनंदन किया।
राष्ट्रीय चेतना का अमर उद्घोष है ‘वंदे मातरम्’
अभाविप ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम की राष्ट्रीय चेतना, स्वाभिमान और राष्ट्रभाव का अमर उद्घोष रहा है। 1896 के कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इसके गायन से लेकर 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके गायन तथा भगत सिंह, रानी गाइडिन्ल्यू, कनकलता बरुआ सहित असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों और जनजाति वीर-वीरांगनाओं के संघर्ष तक, वंदे मातरम् स्वतंत्रता की प्रेरणा का सशक्त स्वर बना रहा।
स्वतंत्रता दिवस हमें उन अमर बलिदानियों के त्याग और संघर्ष का स्मरण कराता है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अभाविप ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के संकल्प और राष्ट्रभाव को आत्मसात करते हुए ज्ञान, नवाचार, कौशल और परिश्रम के माध्यम से 2047 तक विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ का गायन अमर बलिदानियों के प्रति सच्चा सम्मान
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आज लालकिले की प्राचीर से पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ का गायन हमारे अमर बलिदानियों के प्रति सच्चा सम्मान है। यह उन राष्ट्रनायकों की गौरवशाली विरासत का स्मरण है, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। संसद द्वारा वंदे मातरम् के सम्मान एवं गायन को वैधानिक संरक्षण दिया जाना भी अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि अभाविप भारत सरकार द्वारा युवाओं के लिए एआई कौशल प्रशिक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग, खेल प्रतिभा पहचान तथा सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा एवं नागरिक सुरक्षा से जुड़ी घोषणाओं का स्वागत करती है। ये पहलें युवाओं की प्रतिभा और क्षमता को नए अवसरों से जोड़कर विकसित भारत के संकल्प को गति प्रदान करेंगी।
कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को रोकने का प्रयास निंदनीय
अभाविप महामंत्री ने कहा कि इसी गौरवपूर्ण अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ नेत्री की उपस्थिति में ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को रोकने के प्रयास की अभाविप कड़े शब्दों में निंदा करती है। यह केवल वंदे मातरम् का नहीं, बल्कि उन अमर बलिदानियों की विरासत का भी अपमान है, जिन्होंने इसके उद्घोष के साथ मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
अभाविप ने कहा कि आज देश की युवा शक्ति का दायित्व है कि वह स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति, उनके त्याग और राष्ट्रभाव को आत्मसात करे तथा ज्ञान, नवाचार, कौशल और परिश्रम के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान दे।
