नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के एक दिन पूर्व आयोजित पत्रकार वार्ता में अभाविप ने क्लीन स्वीप का दावा किया। अभाविप को विश्वास है कि 18 सितंबर को होने वाले चुनाव में उसे चारों सीटों पर जीत मिलेगी और परिणाम 4-0 रहेगा। डूसू चुनाव से पूर्व आयोजित अभाविप की पत्रकार वार्ता को अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने संबोधित किया। अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी एवं संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्यराज सिंह अभाविप के प्रत्याशी हैं। अभाविप का पूरा पैनल 7-3-3-3 मतदान क्रमांक पर चुनाव मैदान में है। पूरे चुनाव अभियान में प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं ने विद्यार्थियों के बीच जाकर संवाद किया और उनके मुद्दों पर बात की। चारों प्रत्याशियों ने मजबूती के साथ चुनाव लड़ा है और अभाविप को विद्यार्थियों के बीच से व्यापक समर्थन मिला है। अभाविप को विश्वास है कि 18 सितंबर को होने वाले चुनाव में उसे चारों सीटों पर जीत मिलेगी और परिणाम 4-0 रहेगा।
अभाविप दिल्ली विश्वविद्यालय में केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होती। उसके कार्यकर्ता पूरे वर्ष, 365 दिन, 24×7, विद्यार्थियों के बीच रहकर उनकी आवाज उठाते हैं। चुनाव से पहले भी अलग-अलग अभियानों और कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और छात्राओं के बीच लगातार संवाद किया गया। इसके विपरीत, चुनाव के दौरान कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े बाहरी राजनीतिक लोगों की सक्रियता भी सामने आई। इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक जैसे नेताओं द्वारा कक्षाओं में जाकर एनएसयूआई के समर्थन में प्रचार किए जाने से छात्र राजनीति में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप का प्रश्न सामने आया है। कांग्रेस की पूरी राजनीतिक मशीनरी, जिसमें यूथ कांग्रेस, सेवादल और अन्य लोग शामिल हैं, चुनाव में सक्रिय रही, वहीं आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों की गतिविधियां भी सामने आई हैं। 16 सितंबर को अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ हुई हिंसक घटनाओं की निंदा करते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय में अभाविप की ताकत यहां के विद्यार्थी हैं। हमारे कार्यकर्ता पूरे साल विद्यार्थियों के बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं को लेकर काम करते हैं। चुनाव से पहले भी हमने अलग-अलग कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों के बीच लगातार संवाद किया है। इसलिए विद्यार्थी जानते हैं कि कौन जमीन पर उनके साथ रहता है और कौन केवल चुनाव के समय दिखाई देता है। एनएसयूआई ने कैंपस में अपनी जमीन खो दी है और अब बाहरी लोगों के सहारे चुनावी गतिविधियां चलाने की कोशिश हो रही है। इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक जैसे लोगों का कक्षाओं में जाकर एनएसयूआई के लिए प्रचार करना इसी बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप का उदाहरण है। हमारा मुकाबला केवल एनएसयूआई, एएसएपी और दूसरे छात्र संगठनों से नहीं है, बल्कि कांग्रेस की पूरी राजनीतिक मशीनरी, यूथ कांग्रेस, सेवादल और अन्य लोगों की सक्रियता भी इस चुनाव में देखने को मिली है। आम आदमी पार्टी से जुड़े लोग भी सक्रिय रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज डूसू चुनाव में हिंसा, बाहरी तत्वों तथा लिंगदोह समिति और न्यायालय के निर्देशों के उल्लंघन को लेकर जो सख्त टिप्पणी की है, हम उसका स्वागत करते हैं। 16 सितंबर को अभाविप कार्यकर्ताओं पर हमला करने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ तत्काल पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न हो। हमें विद्यार्थियों के समर्थन पर पूरा विश्वास है और 18 सितंबर को अभाविप चारों सीटों पर जीत दर्ज कर 4-0 का परिणाम लेकर आएगी।”
