नई दिल्ली। अभाविप-नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) ने विद्यार्थियों द्वारा आयोजित विमेन सेफ्टी मार्च को पूर्ण समर्थन दिया। सोमवार को मिरांडा हाउस महाविद्यालय से छात्राओं एवं विद्यार्थियों ने मार्च निकाला, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा, सुरक्षित वातावरण और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। मार्च में शामिल छात्राओं ने सुरक्षित एवं सम्मानजनक परिसर की आवश्यकता को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ सचिव रिया छावड़ी सहित अन्य छात्रा नेतृत्व ने मार्च में सहभागिता कर इसका समर्थन किया। विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रसंघों के निर्वाचित अभाविप प्रतिनिधियों के नेतृत्व में भी विद्यार्थियों ने मार्च में सहभागिता की।
अभाविप-नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों को लगातार उठाता रहा है। सुरक्षित परिसर, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डूसू द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लगातार मांगें रखी जाती रही हैं। महिला सुरक्षा का प्रश्न किसी एक दिन, एक मार्च या एक घटना तक सीमित नहीं है। लेडी श्री राम कॉलेज (एलएसआर) प्रकरण के बाद अभाविप ने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक आंदोलन किया तथा पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और कुलपति कार्यालय का घेराव कर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग उठाई।
अभाविप ने कहा कि महिला सुरक्षा के प्रश्न पर मुखर रहने वाले वामपंथी संगठनों की चुप्पी कई गंभीर मामलों में दिखाई देती है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्राओं द्वारा प्रोफेसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों, लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय (एलपीयू) में सामने आए दुष्कर्म के मामले तथा महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियों एवं उन्हें डराने-धमकाने से जुड़े नकुल धुल प्रकरण में इन संगठनों की प्रतिक्रिया को लेकर अभाविप ने सवाल उठाए। अभाविप के अनुसार, महिला सुरक्षा का प्रश्न किसी विचारधारा या राजनीतिक सुविधा के अनुसार चुनने का विषय नहीं हो सकता। प्रत्येक मामले में समान संवेदनशीलता के साथ आवाज उठाना और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई की मांग करना आवश्यक है।
महिला सुरक्षा हमारी प्रतिबद्धता : यश डबास, डूसू अध्यक्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष यश डबास ने कहा, “अभाविप-नीत डूसू के लिए महिला सुरक्षा केवल किसी एक घटना का विषय नहीं, बल्कि हमारी प्राथमिक प्रतिबद्धताओं में से एक है। इसी प्रतिबद्धता के तहत आज विमेन सेफ्टी मार्च में छात्राओं और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। डूसू विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों को लगातार उठाता रहेगा और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष आवश्यक मांगों को मजबूती से रखेगा। हमारा प्रयास रहेगा कि शिकायतों के त्वरित निस्तारण, सुरक्षित परिसर और छात्राओं के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम सुनिश्चित हों। अभाविप-नीत डूसू विद्यार्थियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिबद्धता के साथ लगातार काम करता रहेगा।”
छात्राओं की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं : रिया छावड़ी, डूसू सचिव
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ सचिव रिया छावड़ी ने कहा, “अभाविप-नीत डूसू विमेन सेफ्टी मार्च का पूर्ण समर्थन करता है। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है और इस विषय पर हमारा स्पष्ट रुख जीरो टॉलरेंस का है। एक छात्रा के रूप में मैं मानती हूं कि सुरक्षित परिसर केवल किसी घटना के बाद उठाया जाने वाला मुद्दा नहीं हो सकता। छात्राओं को अपने विश्वविद्यालय में बिना किसी भय के पढ़ने, आने-जाने और अपनी बात रखने का अधिकार है। महिला सुरक्षा को लेकर वामपंथी और अन्य संगठनों का जो चुनिंदा और ‘मैनेज्ड फेमिनिज़्म’ दिखाई देता है, उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों और परिसरों में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मामले सामने आने पर हर मामले में समान संवेदनशीलता और मजबूती से आवाज उठाई जानी चाहिए। महिला सुरक्षा किसी विचारधारा या राजनीतिक सुविधा के अनुसार चुनने का विषय नहीं है। डूसू छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े हर विषय को गंभीरता से उठाता रहेगा और सुरक्षित एवं सम्मानजनक विश्वविद्यालय परिसर के लिए विद्यार्थियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।”
महिला सुरक्षा के नाम पर वामपंथी संगठनों का चुनिंदा और सुविधानुसार सक्रिय होना चिंताजनक : सार्थक शर्मा, प्रदेश मंत्री, अभाविप
अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, “महिला सुरक्षा के नाम पर वामपंथी संगठनों का चुनिंदा और सुविधानुसार सक्रिय होना चिंताजनक है। जब छात्राओं से जुड़े गंभीर मामले सामने आते हैं, तब इन संगठनों की चुप्पी उनके महिला अधिकारों से जुड़े सरोकारों पर प्रश्न खड़े करती है। महिला सुरक्षा किसी विचारधारा की राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि हर छात्रा के सम्मान और अधिकार से जुड़ा प्रश्न है।”
