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आपातकाल : हरियाणा प्रदेश की एकमात्र महिला योद्धा डा. कमला वर्मा

राष्ट्रीय छात्रशक्ति by डा. सोनिका
June 25, 2026
in लेख
आपातकाल की कुछ यादें

emergency

भारत में लोकतंत्र व संविधान की हत्या के सूचक (वर्ष 1975 से 1977 तक थोपे गए) आपातकाल को भूलाया नहीं जा सकता। यह आपातकाल देश पर अमिट स्यहा छाप छोड़ गया जिसे वर्ष 2025 में 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस काल के अनेक दर्दनाक किस्से हैं। उस समय न्याय के लिए आवाज उठाना गुनाह समझा जाता था। लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए जो भी आवाज उठाता उसे दमन व उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ता था। उस दौरान प्रैस पर पाबंदी लगा दी गई थी। संविधान की मूल भावना के साथ मनमानी छेड़छाड़ करते हुए सत्ता का भरपूर दुरूपयोग किया गया। इसके पीछे केवल एक ही कारण था, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी की इच्छानुसार देश का शासन चलाना और प्रधानमंत्री पद पर कब्जा बरकरार रखना। श्रीमति इंदिरा गांधी ने अपने इन मंसूबो के लिए 25 जून 1975 को रात 11:45 बजे आपातकाल लागू किया था। जिसके तहत संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया। पुलिस और प्रशासन को मीसा (मेन्टेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट अर्थात् आंतरिक सुरक्षा अधिनियम) के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। इस एक्ट के विरोध में शामिल नेता व आम आदमी ही नहीं बल्कि विरोधी होने के शक के आधार पर भी विपक्षी नेताओं व आम नागरिकों को भी जबरन गिरफ्तार करके जेलों में कैद कर दिया। जेल में इन लोगों को घोर यंत्रणा व उत्पीड़न भोगना पड़ा। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ-साथ राज्य स्तरीय, शहरी, कस्बे व ग्रामीण नेताओं को भी कैद किया गया था। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ सहित अन्य 26 संगठनों के सभी छोटे-बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया। उस दौरान देश में संविधान की हत्या का दौर शुरू हो गया जिसके विरोध में देश भर में संविधान बचाओं के नारे गूंजने लगे।

हरियाणा प्रदेश में भी इंदिरा गांधी की नीतियों का पुरजोर विरोध किया गया जिसके कारण हरियाणा के सभी मुख्य नेताओं जैसे- डा. मंगल सेन व रामविलास शर्मा आदि को गिरफ्तार किया गया। उस दौरान हरियाणा में विरोध करने वाली एकमात्र महिला डा. कमला वर्मा को भी मीसा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और लगातार 19 माह तक प्रताड़ित किया गया। 25 जून 1975 की रात आपातकाल घोषित करने से पहले ही अनेक नेताओं व सत्ताधारी पार्टी के विरोधियों को दिन में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। डा. कमला वर्मा शाम को लगभग सात बजे प्रेमनगर, यमुनानगर स्थित घर में खाना बना रही थी। उनके पति भी घर में ही थे जबकि उनका 16 वर्षीय पुत्र राजन बाहर गया हुआ था। अचानक पुलिस आई और डा. कमला वर्मा व उनके पति को गिरफ्तार करके ले गई। उनके पुत्र को घर लौटने पर पड़ोसी ने उनके माता-पिता की गिरफ्तारी के बारें बताया। वे भागते हुए पुलिस स्टेशन गए। वहाँ पर एस.एच.ओ हरनाम सिंह से नादान बालक ने अपने माता-पिता के बारे में जानकारी देने के लिए आग्रह किया लेकिन पुलिस अधिकारी ने उनके साथ बदतमीजी की और गाली देकर भगा दिया। दो सप्ताह तक उनके पुत्र निरंतर थाने के चक्कर काटते हुए अपने माता-पिता के बारे में पूछते रहे लेकिन कुछ भी बताया नहीं गया। पंद्रहवें दिन किसी ने बताया कि उनके माता-पिता को अंबाला जेल में भेज दिया गया है। अंबाला जेल पहुंचने पर जेल अधिकारियों ने कहा कि आप डिप्टी कमीशनर से आज्ञा लेकर आओगे तो मिलने दिया जाएगा। काफी दिनों की भागदौड़ के पश्चात डिप्टी कमीशनर ने जेल अधिकारियों एवं सी.आई.डी. अधिकारियों की कड़ी निगरानी में डा. कमला वर्मा व उनके पुत्र की मात्र आधे घंटे की मुलाकात की आज्ञा दी। अंबाला जेल में कैद बारे डा. कमला वर्मा बताती थी कि जिस कोठरी में उन्हें रखा गया था उसमें अनगिनत चूहे थे। चूहें उन्हें जगह-जगह पर काट लेते थे जिसके कारण वह कई-कई दिन सो भी नहीं पाती थी। उनकी हालत गंभीर हो गई थी।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सदस्य ने डा. मंगलसेन जो कि राष्ट्रीयस्वंय सेवक संघ के कार्यकर्ता एवं भारतीय जनसंघ के हरियाणा प्रदेश से प्रमुख नेता थे को डा. कमला वर्मा के हालात के बारें में बताया। डा. मंगलसेन ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से आग्रह किया कि किसी तरह बहन डा. कमला के पास देशी घी या नारियल तेल भिजवा कर उनके सिर में तेल मालिश कर दी जाए तो वे सो सकती हैं और उनका जीवन बचाया जा सकता है। कुछ दिनों बाद डा. कमला वर्मा को उनके परिवार को बताए बिना अंबाला जेल से करनाल जेल में भेज दिया। कई महिनों तक उनके परिवार वाले पूछताछ करते रहे लेकिन कुछ भी नहीं बताया गया। एक व्यक्ति, जो कभी डा. कमला वर्मा के पति का विद्यार्थी रह चुका था और जेल में नौकरी करता था। उस व्यक्ति ने बताया कि डा. कमला को मीसा तथा उनके पति को डीआईआर के तहत गिरफ्तार करके करनाल जेल में रखा गया है। डा. कमला के परिवार के सदस्यों व उनके बेटे को हर रोज सुबह-शाम थाने में हाजिर होना पड़ता था। थाना प्रभारी हरनाम सिंह सत्ताधारी पार्टी के इसारे पर उनके बेटे को डंडे-थप्पड़ों से मारते थे।

डा. कमला के परिजन व बेटा जब करनाल जेल पहुँचे तो शाम हो चुकी थी। संयोग से उसी समय मीसा के तहत गिरफ्तार नेताओं को रोहतक जेल में भेजने के लिए गाड़ी में चढ़ाया जा रहा था। उनके पुत्र राजन बताते हैं कि अपनी माँ की स्थिति देखकर विचलित हो गया था।

डा. कमला वर्मा बताती थी कि रोहतक में मीसा के तहत गिरफ्तार अनेक बड़े नेताओं को रखा गया था जिनमें मुख्यतः देवीलाल, अटलजी, भैरो सिंह शेखावत, सिंकदर बख्त तथा जे..पी. मायुर आदि थे।

कुल 19 माह बाद डा. कमला वर्मा जेल से बाहर आ पाई वे बताती थी कि अंबाला व करनाल जेल में उन्हें अत्यधिक प्रताड़ित किया गया था जिसकी याद आते ही रूह कांप जाती है। इतनी प्रताड़ना के बाद डा. कमला वर्मा जी शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कमजोर हो चुकी थी।

(लेखिका, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक में सहायक प्राध्यापिका हैं।)

 

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