नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का चुनावी अभियान तेज हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर में अभाविप के प्रत्याशियों को लेकर विद्यार्थियों के बीच उत्साह और सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्यराज सिंह अभाविप के प्रत्याशी हैं। अभाविप के पूरे पैनल का मतदान क्रमांक 7-3-3-3 है।
अभाविप के प्रत्याशी और कार्यकर्ता लगातार विभिन्न महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों को समझ रहे हैं। साथ ही, विद्यार्थी परिषद की ओर से छात्रहित के मुद्दों को लेकर सक्रियता से चुनावी अभियान चलाया जा रहा है।
अभाविप ने आरोप लगाया कि एक ओर विद्यार्थी परिषद विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर लगातार जमीन पर सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई अपने राजनीतिक संगठन की कार्यशैली को छात्र राजनीति में दोहराते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। अभाविप का कहना है कि हाल के दिनों में एनएसयूआई के भीतर सामने आए मतभेद और आंतरिक विवाद संगठन में आपसी समन्वय की कमी को उजागर करते हैं।
परिषद के अनुसार, इन आंतरिक विवादों से विद्यार्थियों का ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस और एनएसयूआई की ओर से लगातार नए राजनीतिक और प्रचारात्मक तरीके अपनाए जा रहे हैं। संविधान के रक्षक होने का दावा करने वाले एनएसयूआई से जुड़े लोगों द्वारा संविधान और संगठन के झंडे जलाए जाने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए अभाविप ने कहा कि इससे उनकी कथनी और करनी का अंतर सामने आता है।
अभाविप ने आरोप लगाया कि एनएसयूआई को चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है, इसलिए वह विद्यार्थियों के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय भ्रम और प्रचार के माध्यम से चुनावी माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। परिषद ने कहा कि इसके विपरीत अभाविप लगातार विद्यार्थियों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रही है और छात्रहित के मुद्दों पर काम कर रही है।
अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, “एनएसयूआई में जिस प्रकार के आंतरिक मतभेद और विवाद सामने आ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि संगठन अपने ही लोगों के बीच समन्वय स्थापित करने में असमर्थ है। जो संगठन अपने कार्यकर्ताओं और साथियों के बीच समन्वय और विश्वास कायम नहीं कर पा रहा, वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों की समस्याओं और उनकी आकांक्षाओं को कैसे संभालेगा? एनएसयूआई को विद्यार्थियों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर बात करनी चाहिए, लेकिन वह अपनी अंदरूनी कलह से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रम और प्रचार का सहारा ले रही है।”
उन्होंने कहा, “इसके विपरीत अभाविप लगातार विद्यार्थियों के बीच जाकर उनकी बात सुन रही है और छात्रहित के मुद्दों को लेकर जमीन पर काम कर रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सब कुछ देख और समझ रहे हैं। इस बार विद्यार्थियों का समर्थन अभाविप के साथ है और 7-3-3-3 के साथ विद्यार्थी परिषद का पूरा पैनल निर्णायक विजय की ओर बढ़ रहा है।”
