अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राहुल गांधी एवं कांग्रेस-लेफ्ट तंत्र द्वारा निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय सहित संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतंत्र के प्रति अविश्वास फैलाने तथा दबाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन के प्रयासों के विरोध में स्टॉप एनार्की, एम्ब्रेस डेमोक्रेसी’ के आह्वान पर देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों, प्रांत एवं महानगर केंद्रों पर प्रदर्शन किए। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों में अभाविप के राष्ट्रीय मंत्रियों, प्रदेश मंत्रियों, विश्वविद्यालय छात्रसंघों के निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। निर्वाचन संबंधी शिकायतों का समाधान प्रमाणों और संवैधानिक प्रक्रियाओं से होना चाहिए, न कि संस्थाओं पर दबाव बनाकर या उनके प्रति अविश्वास फैलाकर।
भारत लोकतंत्र है, भीडतंत्र नहीं। सरकारें जनता के मतों से बनती और बदलती हैं. सड़क पर शक्ति प्रदर्शन से नहीं। बांग्लादेश और नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की अराजक राजनीति स्वीकार्य नहीं है। बाहरी ताकतों और डीप स्टेट की भूमिका से जुड़े सवालों के बीच यह स्पष्ट है कि भारत की राजनीतिक दिशा का निर्धारण भारतीय नागरिक ही करेंगे। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें गड़बड़ी के आरोप प्रमाणों के साथ संवैधानिक मंचों पर उठाए जाने चाहिए। केरल, पंजाब और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों में SIR को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख उनके दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े करते हैं। संस्थाओं पर दबाव बनाने और राजनीतिक प्रदर्शनों से विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा आम नागरिकों के दैनिक जीवन में व्यवधान उत्पन्न करना अनुचित है।
दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, केरल और ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में अभाविप की सफलताएँ विद्यार्थी समुदाय के बीच राष्ट्र प्रथम की विचारधारा की स्वीकार्यता को दर्शाती हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अभाविप ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर विजय प्राप्त की, जबकि ओडिशा के विभिन्न महाविद्यालयों में भी उल्लेखनीय सफलता मिली। कई महाविद्यालयों में कांग्रेस समर्थित NSUI को प्रत्याशी तक नहीं मिले। ये परिणाम अभाविप की सांगठनिक शक्ति और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को दशति हैं तथा स्पष्ट करते हैं कि देश का युवा राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ खड़ा है. अराजकता की राजनीति के साथ नहीं।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा, “भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर आधारित है। देश में सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल जनता के पास है, जो अपने मताधिकार के माध्यम से सरकारों को चुनती और बदलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति का स्वागत है, लेकिन भीड़ के दबाव, अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर सत्ता परिवर्तन का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता है, तो उसके लिए प्रमाण प्रस्तुत करते हुए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर राजनीतिक स्वार्थों के लिए सवाल उठाना तथा उन्हें दबाव में लाने का प्रयास लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों से प्रेरित होकर भारत में भी अराजकता के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की कल्पना करने वालों को समझना चाहिए कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और यहां सरकारों का भविष्य जनता तय करती है। दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, केरल और ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में अभाविप को मिली सफलता इस बात का प्रमाण है कि विद्यार्थी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं और राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ खड़े हैं। अभाविप देश के युवाओं से आह्वान करती है कि वे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित की रक्षा के लिए सजग रहें तथा अराजकता और भीड़तंत्र की राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें।”
