सीकर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में छात्रहित और छात्र राजनीति को लेकर माहौल गरमा गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की विश्वविद्यालय इकाई ने छात्रसंघ चुनाव सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े कथित मामलों पर भी सवाल उठाए। परिषद ने पेपर लीक, परीक्षा में कथित नकल, प्रश्नपत्र फाड़ने, विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासनहीनता और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
अभाविप ने कहा कि प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र और नियमित कराए जाने, समान अकादमिक कैलेंडर लागू करने, रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, राजकीय महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति तथा विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा विभाग स्थापित करने की मांग को लेकर संगठन आंदोलनरत है।
अभाविप ने पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में लगातार दूसरी बार अभाविप की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का निर्णय केवल नारों या प्रचार के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन के काम और विचारों को देखकर होता है। परिषद ने कहा कि युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक हैं तथा छात्र राजनीति को शिक्षा और विद्यार्थियों के मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं। अभाविप ने जंतर-मंतर पर हुए कुछ प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि छात्र मुद्दों के नाम पर राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। अभाविप ने कहा कि वह विद्यार्थियों की समस्याओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के पक्ष में है, लेकिन छात्रहित के मुद्दों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने का विरोध करती है। एसएफआई के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए अभाविप ने 17 फरवरी 2024 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार का हवाला दिया। परिषद के अनुसार, समाचार में एसएफआई की सूरजगढ़ तहसील कमेटी के अध्यक्ष से संबंधित शेखावाटी विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र को कथित रूप से बाहर निकालने और पैसे लेने का मामला सामने आया था।
अभाविप ने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करने वाले संगठनों को अपने संगठन से जुड़े आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अभाविप ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए और आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अभाविप ने 28 जुलाई 2026 को शेखावाटी विश्वविद्यालय में एमएससी फॉरेंसिक साइंस की परीक्षा के दौरान एसएफआई से जुड़े पदाधिकारी पर लगाए गए कथित नकल के आरोप का भी उल्लेख किया। अभाविप का कहना है कि संबंधित विद्यार्थी के खिलाफ विश्वविद्यालय की फ्लाइंग टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने और यूएम (Unfair Means) प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अभाविप ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता विद्यार्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ी है। ऐसे मामलों में किसी संगठन या व्यक्ति के दबाव के बजाय निष्पक्ष जांच के आधार पर निर्णय होना चाहिए।
अभाविप ने 18 दिसंबर 2025 को इतिहास की परीक्षा के दौरान कथित रूप से मोबाइल से वीडियो बनाने और प्रश्नपत्र फाड़ने की घटना का भी मुद्दा उठाया। परिषद के अनुसार, इस मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई थी, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय की कुलसचिव से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की। अभाविप के अनुसार, इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित छात्र के विरुद्ध निष्कासन की कार्रवाई की।
18 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय में आयोजित शेखावाटी ज्ञानसभा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए अभाविप ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के बाद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगे बैनर को एसएफआई से जुड़े लोगों ने कथित रूप से क्षतिग्रस्त किया और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। अभाविप ने इसे विश्वविद्यालय की गरिमा और संवैधानिक पदों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने 13 अगस्त को कुलसचिव से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग रखी।
अभाविप ने विश्वविद्यालय के पांचवें और छठे दीक्षांत समारोह का भी उल्लेख किया। अभाविप के अनुसार, 28 मार्च 2025 और 28 मार्च 2026 को आयोजित दोनों दीक्षांत समारोहों में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े की उपस्थिति रही। परिषद का आरोप है कि इन अवसरों पर एसएफआई की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। अभाविप ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि का अवसर होता है। ऐसे आयोजनों को राजनीतिक विरोध का मंच बनाने से विश्वविद्यालय की गरिमा और विद्यार्थियों के हित प्रभावित होते हैं। अभाविप ने 28 जुलाई 2025 को हुए प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के बड़े चैनल गेट को कथित रूप से क्षतिग्रस्त करने तथा 2 अगस्त 2025 को बाहरी लोगों को बुलाकर विद्यार्थियों के साथ मारपीट किए जाने के आरोप भी उठाए।
अभाविप ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखना हर विद्यार्थी संगठन का अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, हिंसा करना या विद्यार्थियों में भय का वातावरण पैदा करना छात्रहित नहीं कहा जा सकता। अभाविप पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष नवीन झांझाड़िया ने कहा कि प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराए जाने के साथ परिषद की पांच सूत्रीय मांगों पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसएफआई से जुड़े पेपर लीक, परीक्षा में कथित नकल, प्रश्नपत्र फाड़ने, बैनर क्षतिग्रस्त करने, दीक्षांत समारोह में विरोध, विश्वविद्यालय संपत्ति को नुकसान और हिंसा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र संगठन से जुड़े मामले में राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर तथ्यों के आधार पर जांच हो और आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति का आधार शिक्षा, लोकतांत्रिक अधिकार, अनुशासन और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा होना चाहिए। अराजकता, हिंसा या परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को छात्रहित का नाम नहीं दिया जा सकता। प्रेस वार्ता में अभाविप जयपुर प्रांत के प्रांत सोशल मीडिया सहसंयोजक विकास गुर्जर, प्रांत जनजाति कार्य सह प्रमुख सतवीर लोयल, इकाई मंत्री राजाराम घील, प्रांत कार्यसमिति सदस्य रेणुका चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
